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भारत के 'बाघों का प्रांत' मध्य प्रदेश वन्यजीव पर्यटन पर ध्यान देने और वन्यजीव संरक्षण के जरिये जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से लड़ने को प्रतिबद्ध
March 2, 2020 • SRISHTI SHARMA • मध्यप्रदेश

 बाघों खासकर विलुप्तप्राय बंगाल टाइगर और दुर्लभ सफेद बाघ के संरक्षण और प्राकृतिक प्रजनन के लिए अनुकूल स्थितियों का निर्माण करने पर अधिक ध्यान देगा मध्य प्रदेश . राज्य के भीतर और लगभग 11 संरक्षित क्षेत्रों का निर्माण करने की योजना

भोपाल:भारत के बाघों के प्रांत मध्य प्रदेश ने वन्यजीव पर्यटन पर ध्यान केंद्रित करने 
और वन्यजीव संरक्षण एवं वनवासियों के उत्थान पर ध्यान देकर जलवायु परिवर्तन व
ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से लड़ने की दिशा में चल रहे अपने प्रयासों को मजबूत करने
की प्रतिबद्धता दोहराई है। यह राज्य बाघों खासकर विलुप्तप्राय बंगाल टाइगर और दुर्लभ
सफेद बाघा के संरक्षण के लिए अनुकूल स्थितियों के निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
29 जुलाई, 2019 को घोषित अखिल भारतीय बाघ आकलन के परिणामों के मुताबिक,
मध्य प्रदेश 526 बाघों के साथ इस देश में पहले पायदान पर
है

मध्य प्रदेश में बाघ संरक्षण के सतत प्रयासों के सुखद परिणाम सामने आए हैं जहां चार साल में बाघों की आबादी 2018 की गणना में 308 से बढ़कर 526 पहुंच गई है। इस तरह से बाघों की आबादी में 218 की अच्छी वृद्धि दर्ज की गई हैइस राज्य में 6 टाइगर रिजर्व हैं जिनमें नेशनल पार्क और वन्यजीव अभयारण्य जैसे कान्हा, पेंच, सतपुड़ा, बांधवगढ़, पन्ना और संजय शामिल हैं। राज्य सरकार की योजना इस राज्य के भीतर और लगभग 11 संरक्षित क्षेत्रों का निर्माण करने की हैवर्तमान में इस राज्य में 25 वन्यजीव अभयारण्य और 11 नेशनल पार्क हैं। नया क्षेत्र 2100 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का होगा जो पिछले तीन दशकों में किसी राज्य द्वारा संरक्षित क्षेत्रों में संभवतः सबसे अधिक बढ़ोतरी है

मध्य प्रदेश सरकार के पर्यटन सचिव और मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक श्री फैज़ अहमद किदवई (आईएएस) के मुताबिक, “अनेकों अभयारण्यों और रिजर्व के साथ मध्य प्रदेश को भारत का वन्यजीव राज्य माना जाता हैऐसे समय में जब कई पशु प्रजातियों की संख्या गिर रही है, मध्य प्रदेश ने भारत के वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों में एक अहम भूमिका अदा की है। तीन मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस के मौके पर हम विलुप्तप्राय वन्यजीव खासकर बाघों का एक वैज्ञानिक, नियोजित और जन केंद्रित दृष्टिकोण के जरिये संरक्षण करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराना चाहेंगे जिसके लिए सख्त दिशानिर्देश और टीम भावना के साथ सहयोग लिया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “बाघों के संरक्षण से लेकर घटते तेंदुओं की संख्या बढ़ाने तक और घड़ियालों की सबसे अधिक आबादी वाले इस राज्य ने अत्यधिक संकटग्रस्त बारहसिंघा की आबादी सफलतापूर्वक बढ़ाई है। मध्य प्रदेश ने पशुओं के लिए प्राकृतिक कम और क्षेत्र के संरक्षण में एक लंबा सफर तय किया हैइसने कई महत्वपूर्ण संरक्षण नीतियों को लागू किया है और शिकार पर अंकुश लगाना सुनिश्चित किया है।'

मध्य प्रदेश के 11 नेशनल पार्कों में से 6 नेशनल पार्क, प्रोजेक्ट टाइगर नाम के संरक्षण कार्यक्रम से जुड़े हैं जिसे केंद्र सरकार द्वारा 1973 में लांच किया गया थाउस समय बाघों की संख्या इतनी तेजी से घटी थी कि ऐसा लगा कि बाघों का अस्तित्व खतरे में है। सरकार ने 2015-16 में मुकुंदपुर, बांधवगढ़ और पेंच में वन्यजीव सर्किट को प्रोत्साहित करने के लिए 92 करोड़ रूपये का सीएफए मंजूर किया था