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दि लस् ट ओवरलैंड अभियान लोवाकिया में लैंड रोवर की विनिर्माण इकाई पहुंचा, अभियान में शामिल टीम न्यू डिफेंडर से हुई रूबरू
December 11, 2019 • SRISHTI SHARMA • बिज़नेस

दि लस् ट ओवरलैंड अभियान लोवाकिया में लैंड रोवर की विनिर्माण इकाई पहुंचा, अभियान में शामिल टीम न्यू डिफेंडर से हुई रूबरू

नाइट्रा, लोवाकिया – वर्ष 1955 के ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज के सुदूर पूर्वी अभियान को पलटते हुए द लस ट ओवरलैंड टीम ने सिंगापुर से लंदन तक की अपनी या । को जारी रखते हुए नाइट्रा, लोवाकिया में जगुआर लैंड रोवर की विनिर्माण इकाई का भी दौरा किया।

वहां, टीम को नवीनतम लैंड रोवर, न्यू डिफेंडर से मिलने का मौका मिला, जो अपने से पहले के "ऑक्सफ़ोर्ड" सीरीज-1 लैंड रोवर के साथ आमने-सामने था नाइट्रा में टीम कास् वागत करने के लिएस् लोवाकिया के प्रधान मं ी पीटर पेलेग्रिनी, जगुआर लैंड रोवर के कार्यकारी निदेशक, विनिर्माण, ग्रांट मैकफर्सन के साथ मौजूद थे

लैंड रोवर 14 दिसंबर को यूनाइटेड किंगडम पहुंचने से पहले पश्चिमी यूरोप यानी ऑ ट्रया, जर्मनीत सि और बेल्जियम से होते हुए या ा करने वाली टीम के साथ लम् ट ओवरलैंड का समर्थन करना जारी रखेगा।

लैंड रोवर के मालिकों का एक जमावड़ा फोके टोन, यूके में लस ट ओवरलैंड टीम कास् वागत करने के लिए पूरे ग्रेट ब्रिटेन और यूरोप से एक होगा। इसके बाद, लंदन में हिल्टन पार्क लेन में या । की समाप्ति से थोड़ा पहले टीम को खासतौर पर मौजूद न्यू डिफेंडर का साथ मिलेगा। यह 1956 के पहले ओवरलैंड अभियान की समाप्ति रेखा से कुछ दूरी पर है

एलेक्स अपनी यादों को ताजा करते हुए कहते हैं, "यह का । वाकई काफी रोमांचक थी। तमाम उतार-चढ़ावों से भरपूर। मैं भरोसा नहीं कर सकता कि इस का । की योजना बनाने में लगे अठारह महीने, कितनी जल्दी अब तक हमें सही-सलामत यहां तक ले आए हैं ! हम एक बार फिर इस 64-वर्षीय अविश्वसनीय कार को दुनिया की सुदूर और आकर्षक जगहों पर ले जाने में कामयाब रहे। हमने इसे उ णकटिबंधीय मानसून, माइनस बीस डिग्री की कड़ाके की ठंड और सम्र तल से 5000 मीटर ऊपर तक ले गए। लेकिन ऑक्सफोर्ड ने छलांग मारते हुए ये दूरियां तय कर लींनगालैंड से तिब्बत और तुर्कमेनि तान से सर्बिया तक, हमें जोस् वागत मिला है, वह वाकई अविश्वसनीय है।"

दि लस् ट ओवरलैंड अभियान: ताकत और धैर्य की एक पाहता किसी भी प्रमुख अभियान की तरह, खासकर कि जिसमें कोई एक ऐसी पुरानी कार में इतनी सारी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार कर रहा हो, द ल ट ओवरलैंड के साथ सम याएं आना लाजिमी था। ऐसी ही एक यात्रं क दुर्घटना काफी यादगार रही, जिसमें ऑक्सफोर्ड का पिछला पहिया तब निकल गया, जब एलेक्स और नैट तुर्कमेनि तान में 70 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे। इसमें गाड़ी का ब्रेक पूरी तरह से अलग हो गया।

जो इंसान का 7 में शामिल थे, उनके लिए भी यह अभियान किसी पत्रता से कम नहीं थाब्रिटेनन सियूएसए, बेल्जियम, इंडोनेशिया और सिंगापुर से आठ टीमों को अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना थाइसमें ऊंचाईयां, तापमान और विमि तरह के भोजन ने उनके शरीर पर जो असर डाला, वह सब कुछ शामिल था। या । के विभि बिंदुओं पर कभी किसी को फूड प्वॉइजनिंग की सम या से, कभी जमा देने वाले तापमान से और कभी खतरनाक ऊंचाईयों पर ऑक्सीजन की वैकल्पिक व्यक था से जूझना पड़ा