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कोविड-19 के दौरान डायबिटिक लोगों के लिए फाइबर एवं माइक्रोन्यूट्रिएंट से भरपूर डाइट और शुगर लेवल की नियमित जांच बहुत जरूरी 
August 19, 2020 • SRISHTI SHARMA • स्वास्थ्य

                                          

कोविड-19 के दौरान डायबिटिक लोगों के लिए फाइबर एवं माइक्रोन्यूट्रिएंट से भरपूर डाइट और शुगर लेवल की नियमित जांच बहुत जरूरी 

नई दिल्ली : भारत के सर्वोच्च व्यापार संगठनों में शुमार एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने अपनी 'इलनेस टु वेलनेस' (बीमारी से स्वास्थ्य की ओर) सिरीज के तीसरे संस्करण का आयोजन किया। तीसरे संस्करण में डायबिटीज के विशेषज्ञों के पैनल के साथ 'कोविड-19 के दौरान डायबिटीज प्रबंधन' विषय पर सार्थक चर्चा हुईविशेषज्ञों ने बताया कि डायबिटीज पर सही से नियंत्रण नहीं रख पाने वाले लोगों में कोविड-19 के लक्षण गंभीर होने का खतरा बहुत ज्यादा रहता है।

हाइजीन ब्रांड सैवलॉन के समर्थन से आयोजित कार्यक्रम में स्वस्थ आदतों, खानपान, व्यायाम एवं संपूर्ण स्वास्थ्य के जरिये स्वास्थ्य कल्याण एवं सेहत की देखभाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इस दौरान वक्ताओं ने बताया कि कैसे भारत में डायबिटिक लोग कोविड-19 के इस दौर में घर पर ही बचाव के कदम उठा सकते हैं।

इंटरनेशनल डायबिटीज फाउंडेशन डायबिटीज एटलस के मुताबिक, डायबिटीज से ग्रस्त लोगों की संख्या के मामले में चीन के बाद दुनिया में भारत का दूसरा स्थान है। भारत में करीब 7.7 करोड़ लोगों के डायबिटीज से पीड़ित होने का अनुमान है

कोविड-19 के दौरान डायबिटीज के मरीजों की सेहत पर निगरानी और नियमित जांच के महत्व को रेखांकित करते हुए मैक्स हेल्थकेयर के एंडोक्रायनोलॉजी एवं डायबिटीज विभाग के चेयरमैन व प्रमुख (पद्म भूषण) डॉ. अंबरीश मित्तल ने कहा, 'कुछ ही समय पहले जांच में सामने आया और बेहतर तरीके से नियंत्रित शुगर लेवल वाला फिट एवं युवा डायबिटीज का मरीज किसी बुजुर्ग व सही से ध्यान नहीं देने वाले डायबिटीज मरीज से बहुत अलग होता है। अगर आप सही से नियंत्रित रखते हैं और एक फिट डायबिटिक हैं, तो आपमें कोविड के लक्षण गंभीर होने का बहुत ज्यादा खतरा नहीं होता है, हालांकि आपको भी अन्य सामान्य लोगों की तरह ही बचाव के सभी प्रोटोकॉल का पालन करना होगाअगर डायबिटीज के किसी मरीज को कोरोना संक्रमण हो जाए और उसमें कोई लक्षण नहीं हो, तो उसे क्वारंटाइन हो जाना चाहिए। अगर उसमें कुछ सामान्य लक्षण हों, तब भी डॉक्टर के संपर्क में रहकर और समय-समय पर जांच कराते हुए होम आइसोलेशन में ही इससे निपटा जा सकता है। अगर आपकी उम्र ज्यादा है, किडनी की बीमारी, डायबिटीज, दिल की बीमारी या ब्लड प्रेशर की शिकायत है तो आपको अस्पताल में भर्ती होने का सुझाव दिया जाता है।'

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए फोर्टिस सी-डॉक के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन (पद्मश्री) प्रोफेसर (डॉ.) अनूप मिश्रा ने कोविड-19 के दौरान डायबिटिक लोगों में नियमित तौर पर जांच एवं शुगर लेवल पर निगाह रखने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, 'अपनी दवाएं लेते रहें, दवाएं बिलकुल नहीं छोड़ें और लगातार शुगर लेवल जांचते रहें। घर पर मॉनिटरिंग किट रखें और अपना शुगर लेवल जांचते रहें। इस समय लैब में जाकर टेस्ट करवाना सही नहीं रहेगा। शुगर मैनेजमेंट एवं उस पर नियंत्रण रखना अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह संकेत मिल सकता है कि अगर आप कोविड से संक्रमित हुए तो आपकी स्थिति कैसी होगी, सामान्य या गंभीर। यह बात नॉन डायबिटिक लोगों पर भी लागू होती है, क्योंकि इस समय बहुत से लोगों का वजन बढ़ रहा है और इससे उनमें डायबिटीज का खतरा ज्यादा हो रहा है।'

पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर और माइक्रो न्यूट्रिएंट से भरपूर स्वस्थ खानपान के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. मिश्रा ने आगे कहा, 'इंटरमिटेंट फास्टिंग एवं कीटो डाइट का रुख नहीं करें। हमेशा की तरह 3-4 बार फलों, सब्जियों, हरी पत्तेदार सब्जियों से भरपूर संतुलित खानपान पर्याप्त हैलोगों को पर्याप्त मात्रा में सूखे मेवों व बीजों तथा फाइबर व माइक्रो न्यूट्रिएंट को भी खानपान में शामिल करना चाहिए।'

इसके बाद उन्होंने नाश्ते के तौर पर लिए जा सकने वाले कई खाद्य पदार्थों के बारे में बताया, जैसे दूध, अंडा, फल, ओट्स या दलिया, बादाम, चिया सीड तथा लंच एवं डिनर के तौर पर चपाती, दाल, रोटी, दही, हरी पत्तेदार सब्जियों, सोया, पनीर, चिकन या फिश का उल्लेख किया।

कोविड-19 के दौरान गर्भवती महिलाओं में डायबिटीज पर नियंत्रण के बारे में दिवाकर्स स्पेशियलिटी हॉस्पिटल की मेडिकल डायरेक्टर एवं कंसल्टेंट ओबीगायनी डॉ. हेमा दिवाकर ने कहा, 'भारत में सभी गर्भवती महिलाओं की शुगर जांच तीसरे एवं छठे महीने में करनी चाहिएअभी होता यह है कि शुगर की जांच बहुत देरी से होती है और उनका शुगर लेवल पहले ही काफी ऊपर जा चुका होता है, जिस कारण से उन्हें इंसुलिन लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जब तक आप खानपान, व्यायाम या अन्य माध्यमों से शुगर लेवल को नियंत्रित रख पाते हैं, उसका मतलब है कि आप सही हैं। हम चाहते हैं कि इंसुलिन का प्रयोग कम रहे क्योंकि इससे गर्भावस्था के दौरान रोज एक डर और अवसाद सा रहता है। इसलिए जल्दी जांच होनी चाहिए और इस पर इंसुलिन के बजाय साधारण तरीके से नियंत्रण पाया जाए क्योंकि यही कोविड-19 के इस दौर में सबसे सही तरीका है।'

उन्होंने आगे कहा कि कोविड पॉजिटिव मां को स्तनपान कराना नहीं छोड़ना चाहिएउन्होंने कहा, 'पहला कदम यह है कि जब तक मां की तबीयत बहुत ज्यादा खराब नहीं हो, तब तक बच्चे का स्तनपान नहीं छुड़ाना चाहिए। ज्यादातर कोविड पॉजिटिव गर्भवती महिलाओं में कोई लक्षण नहीं होता है, इसलिए मास्क पहनने, हाथ धोने और साफ सफाई के प्रावधानों का पालन करते रहना चाहिएसाथ ही उसको स्तनपान की अनुमति भी देनी चाहिए। मां या किसी भी रिश्तेदार को बच्चे को बार-बार गोद में नहीं लेना चाहिए। हम स्तनपान की अनुमति इसलिए देते हैं क्योंकि मां के दूध में वायरस की अब तक पुष्टि नहीं हुई है।'

एसोचैम सीएसआर काउंसिल के चेयरमैन श्री अनिल राजपूत ने दुनिया में बहुत ज्यादा लोगों के डायबिटिक होने के बारे में कहा, 'दुनिया में डायबिटीज से पीड़ित हर छह इंसान में से एक भारतीय है। यह बहुत गंभीर मामला है। कोविड-19 अपनी शुरुआत से ही बहुत चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गई है और डॉक्टर एवं शोधकर्ता इसका निदान खोजने में लगे हैं। मुझे लगता है कि भारत अभी तक इस चुनौती से बहुत बेहतर तरीके से लड़ा है और लगातार लोगों को सुझाव देने में लगे फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्कर्स एवं विशेषज्ञों के प्रयास से हमारे देश के सामने इस चुनौतीपूर्ण समय से पार पाने का बेहतर विकल्प हैलोगों को मानसिक मजबूती के साथ इस संकट का सामना करना चाहिए, ताकि हम इससे पार पा सकें और हमारी जिंदगी में खुशियों भरे दिन फिर से आ सकें।'

इस कार्यक्रम का संचालन करने वाले टोटल केयर कंट्रोल के संस्थापक एवं निदेशक डॉ. राजेश केसरी ने कोविड-19 के दौरान डायबिटीज के मरीजों की परेशानी का उल्लेख किया और विशेषज्ञों के समक्ष रोचक और सार्थक प्रश्न रखे।