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मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के छात्रों की तुलना में प्राइवेट स्कूलों के बच्चों का प्रदर्शन है बेहतर : 'भारत में प्राइवेट स्कूलों की स्थिति पर सेक्टर रिपोर्ट'
August 19, 2020 • SRISHTI SHARMA • शिक्षा

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के छात्रों की तुलना में प्राइवेट स्कूलों के बच्चों का प्रदर्शन है बेहतर : 'भारत में प्राइवेट स्कूलों की स्थिति पर सेक्टर रिपोर्ट'

भोपाल : हाल ही में जारी 'भारत में प्राइवेट स्कूल - स्थिति पर सेक्टर रिपोर्ट' में कहा गया है कि पूरे भारत में प्राइवेट स्कूल पंजीकरण मामले में मध्य प्रदेश तीसरा सबसे बड़ा राज्य हैराज्य के कुल छात्रों में से 38.2 प्रतिशत छात्र प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। गुणवत्तापूर्ण स्कूल शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में काम करने वाले गैर-लाभकारी संगठन सेंट्रल स्कवायर फाउंडेशन और सामाजिक प्रभाव पर केंद्रित निवेश कंपनी ओमिदयार (Omidyar) नेटवर्क इंडिया द्वारा जारी इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले एक दशक के दौरान मध्य प्रदेश में प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। इससे प्राइवेट स्कूलों में छात्रों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए काम करने की आवश्यता पर बल दिया है

इस रिपोर्ट को श्री अमिताभ कांत, सीईओ, नीति आयोग द्वारा जुलाई, 2020 में एक वर्चुअल वेबीनार में जारी किया गया था। यह रिपोर्ट इस क्षेत्र पर मौजूदा शोध और साक्ष्यों का एक व्यापक विश्लेषण है। यह रिपोर्ट सेक्टर के आकार, इसके सामने चुनौतियों और प्रत्येक राज्य में छात्रों के लिए शिक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए संभावित सुधारों पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराती है। विशेषरूप से, मध्य प्रदेश में, रिपोर्ट में पाया गया है कि ग्रामीण प्राइवेट स्कूलों में पिछले छह सालों के दौरान पढ़ने और गणित कौशल में थोड़ा सुधार हुआ है। यह इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि राज्य में पढ़ने और गणित के मापदंडों पर सरकारी स्कूलों की तुलना में प्राइवेट स्कूलों का प्रदर्शन बेहतर है। प्राइवेट स्कूलों में कक्षा 5 के 63.1 प्रतिशत बच्चे कक्षा 2 की किताब पढ़ सकते हैं, वहीं सरकारी स्कूलों में यह संख्या 34.4 प्रतिशत है। इसके अलावा, सरकारी स्कूलों के 16.5 प्रतिशत छात्रों की तुलना में प्राइवेट स्कूलों के 29.5 प्रतिशत कक्षा 5 के छात्र गुणा-भाग कर सकते हैंहालांकि, सीखने का स्तर कक्षा-स्तर की शिक्षा के अनुरूप नहीं है और यह एक चिंता की वजह है

आशीष धवन, संस्थापक-चेयरमैन, सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन, ने प्राइवेट स्कूलों में हम कैसे छात्रों की शिक्षा को बेहतर कर सकते हैं पर बात करते हुए कहा, “प्राइवेट स्कूल सेक्टर के महत्व को समझना बहुत महत्वपूर्ण है, जो मध्य प्रदेश में लगभग प्रत्येक 2 में से 1 छात्र को शिक्षत करते हैं। हमें गुणवत्ता के आधार पर शिक्षा के स्तर में सुधार और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्रीय सुधारों की जरूरत है। कक्षा 3, 5 और 8 में मुख्य चरण की परीक्षाओं (key stages examination) के आधार पर मूल्याकंन-आधारित, जैसा नई शिक्षा नीति - NEP (नेशनल एजुकेशन पालिसी) में सुझाव दिया गया है, एक विनियामक ढांचा (regulatory framework) तैयार करने में मदद कर सकता है जो शिक्षा परिणामों पर केंद्रित होगायह एक संकेतक भी बन सकता है, जो अभिभावकों को सभी स्कूलों के बीच शिक्षा के स्तर की तुलना करने और अपने बच्चों के लिए बेहतर स्कूल का चयन करने में सक्षम बनाएगा।"

रूपा कुडवा, प्रबंध निदेशक, ओमिदयार (Omidyar) नेटवर्क इंडिया ने कहा, “हमें स्कूल का चुनाव करते समय शिक्षा गुणवत्ता पर आधारित एक सही निर्णय लेने के लिए अभिभावकों को सशक्त बनाने की जरूरत है। शिक्षा पर स्कूलों का प्रदर्शन कैसा है इस बारे में सही जानकारी के अभाव में, अभिभावक स्कूल के इंफ्रास्ट्रक्चर या अंग्रेजी बोलने जैसे मापदंडों को महत्व देते हैं। परोपकारी पूंजी तीन प्रमुख क्षेत्रों- जागरूकता फैलाने, स्कूलों द्वारा स्वयं पारदर्शिता को बढ़ाने और अभिभावकों एवं स्कूलों के बीच जुड़ाव- की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।”

सेक्टर की चुनौतियों और वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, रिपोर्ट में क्षेत्रीय सुधार के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं, जो प्राइवेट स्कूल सेक्टर के लिए एक सक्षम वातावरण बनाने में मदद करेगा:

• एक सार्वभौमिक शिक्षा संकेतक या इंडिकेटर जो अभिभावकों को स्कूलों के बीच शिक्षा के स्तर की तुलना करने और सही निर्णय लेने में मदद करेगा। एक व्यावहारिक मान्यता ढांचे का विकास करना, जो कम शुल्क वाले स्कूलों की बाधाओं और कारकों को सीखने और बच्चे पर ध्यान केंद्रित करते हुए कार्यान्वित करने की क्षमता प्रदान करता है। प्राइवेट स्कूल सेक्टर के लिए एक स्वतंत्र नियामक संस्था की स्थापना • गैर-लाभकारी वर्गीकरण और मौजूदा फीस नियमन की समीक्षा की जाए ताकि स्कूलों में निवेश को आकर्षित किया जा सके और उन्हें आसान ऋण के लिए सक्षम बनाया जा सके। आरटीई की धारा 12(1)(c) को मजबूत बनाया जाए, जो मजबूत लक्ष्यीकरण और शुल्क प्रतिपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वंचित वर्ग के बच्चों के लिए प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षण को अनिवार्य बनाता है 

रिपोर्ट में उल्लिखित जनसांख्यिकी आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में, 33.7 प्रतिशत लड़कियां और 42.2 प्रतिशत लड़के प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। राज्य औसत की तुलना में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग का एक छोटा सा हिस्सा प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने जाता है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर कुछ ऐसे जिले हैं जहां सबसे ज्यादा बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जाते हैं, वहीं अलिराजपुर, डिंडोरी, मंडला की हिस्सेदारी कम है। सभी जिलों में, इंदौर में सबसे ज्यादा 76.9 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं और अलिराजपुर में सबसे कम 9.7 प्रतिशत बच्चे प्राइवेट स्कूलों में जाते हैं