ALL बिज़नेस मनोरंजन स्वास्थ्य भोपाल आलेख मध्यप्रदेश शिक्षा
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना मध्यप्रदेश के युवाओं में कौशल के ज़रिए ला रही है बदलाव
March 16, 2020 • SRISHTI SHARMA • शिक्षा

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना मध्यप्रदेश के युवाओं में कौशल के ज़रिए ला रही है बदलाव

भोपाल : भारत में दुनिया की सबसे अधिक युवा आबादी है। देश में 62 फीसदी अधिक आबादी कार्यशील उम्र (15 से 58 वर्ष) की है और तकरीबन 54 फीसदी आबादी की उम्र 25 साल से कम है। इसी जनसांख्यिकी लाभांश का फायदा उठाने के लिए भारत के लिए जरूरी है कि यह अपने युवाओं को रोजगार कौशल एवं जानकारी के साथ सक्षम बनाए, ताकि वे देश के आर्थिक विकास में योगदान दे सकें। मौजूदा प्रतिभा के विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री जी ने युवाओं को उद्योग के अनुरूप प्रासंगिक कौशल प्रदान करने के लिए कौशल भारत मिशन' की शुरूआत की

इस के मद्देनजर कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के द्वारा अंजाम दिया जा रहा है, जिसका लॉन्च 2015 में हुआ और 2016 में इस पर काम शुरू किया गया। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना अल्पकालिक प्रशिक्षक्षण एवं आरपीएल के जरिए रोजगार योग्य बनाकर देश की कौशल प्रणाली को बढ़ावा देती है। एनएसडीसी और एमएसडीई ने नीतियों में उललेखनीय सुध्यार एवं अन्य हस्तक्षेप किए हैं, जो देश के युवाओं को मौजूदा एवं नए अवसरों के साथ सशक्त बनाकर देश की कौशल प्रणाली में योगदान दे रहे हैं।

मध्यप्रदेश ने कौशल विकास के प्रयासों में उल्लेखनीय प्रगति की है और बड़ी संख्या में युवाओं को कौशल प्रदान कर अन्य राज्यों के लिए भी बेंचमार्क स्थापित किए हैं। एमएसडीई ने राज्य में अपनी पहलों के जरिए सुनिश्चित किया है कि इसक प्रोग्राम जिला एवं स्थानीय स्तर पर हर व्यक्ति तक पहुंचये। कुशल युवाओं के लिए अवसर निर्मित किए गए हैं और उम्मीदवारों को उनके करियर में मदद करने के लिए स्प्ष्ट मार्ग प्रशस्त किया गया है।

यह प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की प्रभाविता एवं इससे जुड़े लोगों के प्रयासों का परिणाम है कि देश पोजना के तहत 92 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया जा चुका हैप्रोग्राम की सफलता सिर्फ आंकड़ों से ही स्पष्ट नहीं होती है, एमएसडीई एवं इसके साझेदार संगठनों के अथक प्रयासों के चलते युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कष्ट प्लेसमेन्ट मिले हैं। एमएसडीई यवाओं को नौकरियों के लिए उचित कौशल प्रदान करने तथा इक्विटी, अनुदान एवं ऋण के जरिए उनके रोजगार को बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

  आकाश शर्मा, जितेन्द्र सिंह मेहर, छाया यादव, अनिल वर्मा, आनंद मेवेदा, राजेन्द्र समाधिया एवं नेहा मवादा भोपाल के ऐसे कई युवा हैं जिनका जीवन प्रधानमंत्री कौशल केन्द्रों ने पूरी तरह बदल दिया है। 21 वर्षीय आकाश शर्मा, भोपाल के निवासी है, सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता की अचानक मृत्यु के बाद उनके परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा, जिसके चलते परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया। इस मुश्किल समय में आकाश अपने परिवार के लिए अधिक जिम्मेदार हो गया। आकाश ने भोपाल के एआईएसईसीटी एजुकेशन सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का प्रशिक्षण साझेदार है और फास्टेस्ट टेक्नोक्राफ्ट, भोपाल में डोमेस्टिक डेटा एंट्री ऑपरेटर को रूप में काम शुरू किया। उनके उत्कृष्ट कौशल को देखते हुए आकाश को प्रोमोट कर दिया गया अब वे 12000 रु महीना कमा लेते हैं और अपने करियर से बेहद खुश कि वे अपने परिवार को आर्थिक सहायता दे पा रहे हैं।

28 वर्षीय जितेन्द्र सिंह मेहर भोपाल के निवासी हैं अपने माता पिता और पांच छोटे भाई बहनों के साथ रहते हैं। उनके पिता किसान हैं और मां गृहिणी हैं। उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब उन्होंने एअईएसईसीटी एजुकेशन सेंटर में रीटेल सेल्स एसोसिएट के रूप में प्रशिक्षण लिया, जिसके बाद उन्हें 8000 रु महीना की नौकरी भी मिल गई। आज जितेन्द्र अपने परिवार को सहयोग प्रदान कर सकते हैं, वे अपने और परिवार के कल्याण में योगदान दे रहे हैं।

21 वर्षीय अनिल वर्मा माय मुद्रा फिनकोर्प प्रा लिमिटेड में फील्ड टेकनिशियन कम्प्युटिंग एवं पेरिफरल्स के रूप में काम करते हैं, वे एक किसान के परिवार से हैं, बहुत कम उम्र में उन्होने अपने परिवार को आर्थिक सहायता देने का फैसला लिया और एआईएसईसीटी एजुकेशन सेंटर में एक कोर्स शुरू किया। अब उनका वेतन 9500 रु प्रति माह है। वे अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हैं। वे पांच सदस्यों के अपने परिवार को सहायता प्रदान कर पा रहे हैं।

18 वर्षीय आनंद मवादा, पीएनआर में फील्ड टेकनिशियल, कम्प्युटिंग एवं पेरिफरल्स के रूप में काम करते हैं। आरनुद का परिवार आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा था। उनके पिता किसान हैं और मां गृहिणी हैं। इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने परिवार को आर्थिक सहायता देने का फैसला लिया और एआईएसईसीटी सेंटर में कोर्स श्शु रू किया। वर्तमान में उनका वेतन 12000 रु प्रति माह है और वे अपने परिवार को वित्तीय सहायता प्रदान करने में सक्षम हैं।

  25 वर्षीय राजेन्द्र समाधिया एस ग्रुप सिक्योरिटीज़ सर्विसेज़ में अनआर्ड सिक्योरिटी गार्ड हैं, उनक पिता सेवानिवृत अधिकारी और मां गृहिणी हैं। उन्होनें एआईएसईसीटी एजुकेशन सेंटर भोपाल से प्रशिक्षण प्राप्त किया, और सिक्योरिटी सेवाओं में काम शुरू किया। राजेन्द्र के माता-पिता को उन पर गर्व है, कि वे अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

38 वर्षीय छाया यादव विवाहित हैं। लम्बी बीमारी के बाद उनके पिता के निधन के चलते उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। उनकी मां गृहिणी हैं। छाया वर्तमान में एआईएसईसीटी में काम करती हैं और 18000 रु प्रति माह कमा लेती हैं। छाया केपति और उनकी मां को उनकी उपलब्धियों पर गर्व है, कि वे अपने परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही हैं।

नेहा मेवाड़ाए 19 साल की उम्र में प्रभात एग्रो इंडस्ट्रीज में काम करती हैं। उसके पिता एक किसान और माँ एक गृहिणी हैं। भोपाल के एआईएसईटी शिक्षा केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बादए वह अपने परिवार का समर्थन करने के लिए एग्रो इंडस्ट्रीज में शामिल हो गईंनेहा के माता-पिता को उनकी उपलब्धियों और उनके द्वारा प्रदान की गई स्थिरता के लिए गर्व है।