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शिशुओं के लिए स्वच्छता के नियम, जिनका पालन हर मां को करना चाहिए
May 7, 2020 • SRISHTI SHARMA • बिज़नेस

                               

शिशुओं के लिए स्वच्छता के नियम, जिनका पालन हर मां को करना चाहिए

शिशुओं को संक्रमण आसानी से हो जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली का विकास चल रहा होता है। इसलिए माता-पिता को अपने शिशु को संक्रमण करने वाले जर्स एवं बैक्टीरिया से बचाकर रखना बहुत जरूरी होता है। स्वच्छता बनाए रखने के महत्व के बारे में माताओं से बात करते हुए डॉक्टर प्रतिभा बबशेत, आयुर्वेद विशेषज्ञ, हिमालया ड्रग कंपनी ने बताया, “ स्वच्छता बनाए रखने से शिशुओं के प्रतिदिन संपर्क में आने वाले जर्स व बैक्टीरिया के कारण उनके बीमार होने की संभावना घट जाती है। इसलिए शिशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए माता-पिता, खासकर माताओं को अच्छी हाईजीन बनाए रखना जरूरी है क्योंकि शिशु उनके साथ ही सबसे ज्यादा समय गुजारता है।"

यमित तौर पर हाथ वॉश करने का सुझाव देती हैं क्योंकि हाथों में आम जुकाम, फ्लू एवं अन्य संक्रमण करने वाले बैक्टीरिया और जर्स होते हैं। डॉक्टर प्रतिभा ने कहा, "नुकसानदायक जर्स व बैक्टीरिया से बचने के लिए अपने हाथों को नियमित तौर पर सही तरीके से और कम से कम 20 सेकंड तक पानी और साबुन से धोना बहुत जरूरी है। शिशु को खाना देने से पहले, नैपी बदलने के बाद, पालतू जानवरों को छूने के बाद या फिर कोई भी सतह छूने के बाद अपने हाथों को धोलें। अपने बच्चों को भी हाथ धोने के लिए प्रोत्साहित करना अतिआवश्यक है। यदि आपके पास हाथ धोने की सुविधा न हो, तो अपने साथ सदैव सैनिटाईजर रखें।"

माता पिता को सतहों को डिसइन्फैक्टैंट से साफ करते रहना चाहिए क्योंकि शिशु खेलते वक्त या फिर पैरों पर स्वच्छता वक्त फर्श की सतह एवं घर में हर चीज की सतह के संपर्क में आता है। स्वच्छता के मामले में नहाना भी बहुत जरूरी है। डॉक्टर प्रतिभा ने कहा, "अपने बच्चे को साफ सुथरा रखने के लिए अच्छी तरह से नहलाना जरूरी है। अपने शिशु की तौलिया को हर 3 से 4 माह में बदल दें। माताओं को भी अच्छी हाईजीन बनाए रखना जरूरी है, जिससे उनके जर्स शिशु तक न पहुंच सकें।"

दैनिक दिनचर्या में स्वच्छता बनाए रखने की जरूरत के बारे में डॉक्टर प्रतिभा ने नई माताओं को सुझाव दिया कि वो हर 2 से 3 घंटों में शिशु का डायपर बदल दें और शिशु को साफ करती रहें। शिशु के कपड़ों को नियमित तौर पर व्यस्कों के कपड़ों से अलग धोएं क्योंकि व्यस्कों के कपड़ों के जर्स शिशु के कपड़ों में जा सकते हैं। डॉक्टर प्रतिभा ने कहा, “माताएं शिश का लॉन्ड्री डिटरजेंट अलग रख सकती हैं, जो शिश के कपड़ों के लिए प्रभावशाली व जेंटल हो। यह डिटरजेंट प्राकृतिक क्लीनसिंग एजेंट्स, हर्स से बना हो तथा इसमें एंटीबैक्टीरियल गण हों और साथ ही इसमें फॉस्फोरस, पैराबंस, एसएलएस/एसएलईएस/एएलएस, सिंथेटिक कलर, एडेड ब्लीच एवं सिलिकेट्स न हों।"

वो माता-पिता को अपनी दैनिक दिनचर्या में इन विधियों को शामिल करने का सुझाव देती हैं क्योंकि अससे उनके शिशु का पालन पोषण स्वच्छ व जर्म-फ्री वातावरण में होगा।