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सिगरेट के अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए एफएआईएफए ने वित्त मंत्री से तंबाकू पर संतुलित कराधान की अपील की
February 20, 2020 • SRISHTI SHARMA • बिज़नेस

                                         

आरओडीटीईपी स्कीम में शामिल करते हुए भारतीय तंबाकू के निर्यात को प्रोत्साहित करने मांग

नई दिल्ली : भारत के विभिन्न राज्यों में वाणिज्यिक फसलों के लाखों किसानों और खेत श्रमिकों के प्रतिनिधि गैर-लाभकारी संगठन फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर देश में सिगरेट पर कराधान की व्यवस्था को ज्यादा व्यावहारिक बनाने की अपील की, क्योंकि यह सीधे तौर पर लाखों तंबाकू किसानों और कृषि श्रमिकों की आजीविका से जुड़ा मामला है।

केंद्रीय बजट 2020-21 में सिगरेट पर एनसीसीडी में प्रस्तावित वृद्धि को रेखांकित करते हुए फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) के प्रेसिडेंट श्री जावरे गौड़ा ने कहा, “कर में यह वृद्धि तस्करी कर लाए हुए सिगरेट के कारोबार को बढ़ावा देने वाली साबित होगी और घरेलू तंबाकू की मांग में कमी आएगी। डब्ल्यूएचओ के एकतरफा नियमन के साथ-साथ ऊंचे कराधान, तस्करी कर लाए हुए, अवैध एवं जाली सिगरेट के दबाव के कारण 2019-20 में देश में एफसीवी का उत्पादन 21 करोड़ किलोग्राम पर आ गया, जो 2013-14 में 32.5 करोड़ किलोग्राम रहा था। इससे एफसीवी तंबाकू उत्पादों को कुल 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। भारत में अवैध सिगरेट कारोबार लगातार बढ़ रहा है। 2005 के 12.5 अरब स्टिक की तुलना में 2018 में इसका कारोबार दोगुना होकर 26.5 अरब स्टिक पर पहुंच गया। इस समय भारत अवैध सिगरेट के मामले में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा और सबसे तेजी से बढ़ता हुआ बाजार हैसिगरेट पर टैक्स की मौजूदा दरों के आधार पर गणना की जाए तो अवैध सिगरेट कारोबार के कारण सरकार को 13,000 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।

श्री जावरे गौड़ा ने आगे कहा, "कई रिप्रजेंटेशन के जरिये हमारी वास्तविक स्थिति से अवगत कराए जाने के बाद हम सरकार की ओर से एनसीसीडी में ऐसी किसी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं कर रहे थे। इन रिप्रजेंटेशन में फसल नष्ट हो जाने और साथ ही तस्करी कर लाए हुए एवं अवैध सिगरेट बाजार के कारण एफसीवी तंबाकू किसानों को होने वाले नुकसान तथा किसानों की संघर्षपूर्ण स्थिति की जमीनी हकीकत से सरकार को अवगत कराया गया था। काफी हद तक असंगठित सेक्टर जैसे बीड़ी उद्योग पर टैक्स का कोई दबाव नहीं है।”

एफएआईएफए ने भारत सरकार से तंबाकू को निर्यात उत्पादों पर ड्यूटी या टैक्स में छूट (आरओडीटीईपी) स्कीम में शामिल करने और प्रमोशन स्कीमों के माध्यम से इसके निर्यात को बढ़ावा देने की अपील की है। भारत सरकार ने तंबाकू निर्यात पर मिलने वाले इनसेंटिव खत्म कर दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धी क्षमता कम हो गई है। वहीं जिंबाब्वे, मालावी आदि जैसे देश इनसेंटिव व सब्सिडी देकर अपने तंबाकू किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं।

करों में वृद्धि आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में इस साल बेमौसम बरसात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे एफसीवी तंबाकू उत्पादक किसानों के लिए बड़ा झटका है। सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी में बेतहाशा वृद्धि से वैध सिगरेट उत्पादन कम होगा और इससे घरेलू विनिर्माताओं द्वारा तंबाकू की खरीद कम होगी, कीमतों पर प्रभाव पड़ेगा और किसानों की कमाई कम होगी तथा तनाव और बढ़ेगा।

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस (एफएआईएफए) के वाइस प्रेसिडेंट श्री जी. शेषागिरि राव ने कहा, "हम सरकार से देश में अवैध कारोबार के विरुद्ध कड़े कदम उठाने और इन्हें पूरी तरह समाप्त करने की अपील करते हैं। हम एनसीसीडी में प्रस्तावित वृद्धि वापस लिए जाने और वैध सिगरेट पर कर व्यवस्था में स्थिरता की अपील भी करते हैं, जिससे बढ़ते अवैध सिगरेट कारोबार पर रोक लग सके और देश में तंबाकू किसानों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।"

तस्करी कर लाए हुए सिगरेट में भारतीय तंबाकू का इस्तेमाल नहीं होता है और जिससे किसानों की आय पर दुष्प्रभाव पड़ता है और लोगों की आजीविका छिनती है। वहीं जिंबाब्वे और मालावी जैसे देशों के तंबाकू किसानों का लाभ होता है।

एफसीवी तंबाकू उत्पादक भारत में वैध सिगरेट कारोबार पर निर्भर हैं। भारतीय सिगरेट ब्रांडों द्वारा इस्तेमाल होने वाला 95 प्रतिशत तंबाकू देश में ही पैदा होता है और इसकी खरीद स्थानीय एफसीवी किसानों से होती है। इसकी तुलना में लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय सिगरेट ब्रांड अपनी जरूरत का करीब 5 प्रतिशत तंबाकू ही भारतीय एफसीवी किसानों से लेते हैं। यह इस्तेमाल भी मात्र फिलर के रूप में होता है; इसलिए यह उनके लिए जरूरी घटक नहीं होता और आसानी से ऐसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड इनका विकल्प खोज सकते हैं।

जीएसटी की अवधारणा एक साधारण एवं रेवेन्यू न्यूट्रल टैक्स के रूप में की गई थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य टैक्स बेस को बढ़ाना, एक के बाद एक कई करों वाली व्यवस्था के असर को कम करना, बेहतर अनुपालन सुनिश्चित करना और सभी अप्रत्यक्ष कर, सेस, ड्यूटी आदि को एक में मिलाते हुए कर का बोझ कम करना था।

हालांकि मौजूदा व्यवस्था इस उद्देश्य से विपरीत बनी हुई है। 2001 में अस्थायी कदम के तौर पर लगाए गए एनसीसीडी को दुर्भाग्य से न कम किया गया और न ही खत्म किया गया। इसी के साथ 17 जुलाई, 2017 को जीएसटी काउंसिल ने सिगरेट पर कंपनसेशन सेस दरों में तेज वृद्धि का एलान कर दिया, जिससे देश के फ्लू क्योर्ड वर्जीनिया (एफसीवी) किसानों पर बुरा असर पड़ा।

एनसीसीडी में वृद्धि का एलान केवल तंबाकू उत्पादों के लिए किया गया है, जो जीएसटी के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसलिए हम किसान समुदाय के लोग भारत सरकार से तंबाकू पर एनसीसीडी में वृद्धि पर पुनर्विचार करने और इसे वापस लेने की अपील करते हैं।