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ज़ी टीवी के सितारों ने कहा, 'हैप्पी टीचर्स डे'
September 3, 2020 • SRISHTI SHARMA • मनोरंजन

ज़ी टीवी के सितारों ने कहा, 'हैप्पी टीचर्स डे'

मुंबई : ज़ी टीवी के कुर्बान हुआ में चाहत का किरदार निभा रहीं प्रतिभा रांटा ने कहा, “स्कूल और कॉलेज के दिनों में टीचर्स डे हमारे लिए सबसे खास दिन होता था। मुझे इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता था क्योंकि इस दिन हमें स्टेज पर परफॉर्मेंस देने का मौका मिलता था। मेरे लिए यह दिन हमेशा से बहुत मायने रखता है। आज हम जो भी हैं, उसमें हमारे टीचर्स का बहुत बड़ा योगदान है। हम कुछ लोगों से मिलते हैं, जो हमारे टीचर बन जाते हैं और हमारे लिए भी यह जरूरी है कि हम अपनी जिंदगी में उनकी मौजूदगी का शुक्रिया अदा करें।"

ज़ी टीवी के कुर्बान हुआ में नील का किरदार निभा रहे करण जोतवानी ने कहा, “टीचर्स का जिक्र चला है तो मैं यहां अपनी मां के बारे में बताना चाहूंगा जो मेरी जिंदगी की पहली और सबसे खास टीचर रही हैं। मेरी मां पेशे से भी एक टीचर थीं। मुझे याद है टीचर्स डे पर वो घर पर जितनी भी चॉकलेट्स लाती थीं, हम सभी लूट लेते थे। यही उस समय की मेरी सबसे खास यादों में से एक हैमैं अपने सभी टीचर्स का आभारी हूं जिन्होंने मुझे सिखाया और शिक्षत बनाया। अपने एक्टिंग करियर में मेरे पिछले शो की क्रिएटिव प्रोड्यूसर इंडस्ट्री में मेरी मेंटर और मेरी मार्गदर्शक रही हैं। वो मेरा मजबूत सहारा रही हैं और मेरे हर अच्छे-बुरे वक्त में हमेशा मेरा साथ दिया है, खासतौर से तब जब मुझे नाकामी हासिल हुई। मैं कहना चाहूंगा कि उन्होंने मुझे वो एक्टर बनाया, जो मैं आज हूं। मैं खुद को खुशकिस्मत मानता हूं कि मुझे इंडस्ट्री में ऐसा मार्गदर्शक मिला।”

सारेगामापा लिटिल चैंप्स के जज हिमेश रेशमिया ने कहा, “मैं अपने पिता की मदद से संगीत की दुनिया में आया, जो भारत में इलेक्ट्रॉनिक इंस्ट्रूमेंट्स पेश करने वाले पहले व्यक्ति हैं और साथ ही एक बेहतरीन संगीतकार भी हैं। एक सिंगर और कंपोज़र के रूप में संगीत को समझने से लेकर आधुनिक और भारतीय धुनों की अलग-अलग बारीकियां पहचानने तक, वो मेरी जिंदगी में एक सच्चे गुरु और टीचर की तरह रहे हैंमेरी शुरुआती उम्र से ही उन्होंने मुझे हमेशा सिखाया कि संगीत का मतलब है, कुछ खास नियमों का पालन करना, जो आधुनिक दौर में भी लागू होते हैं, बशर्ते हमें संगीत की पूरी समझ हो। जब मैंने 15 साल की उम्र से कंपोजिंग शुरू की, तो मैंने उनके शब्दों का महत्व कभी नहीं समझा था, लेकिन संगीत निर्देशन में आने से पहले जब मैंने अलग-अलग गाने कंपोज़ किए, तब मुझे एहसास हुआ कि वो इस मामले में मेरे प्रति इतने सख्त क्यों रहते थे। असल में जब मैंने 'आशिक बनाया आपने कंपोज़ किया और गाया, जिसके लिए मुझे अपना पहला अवार्ड भी मिला, तब मैंने जाना कि यह उनकी बातों का ही असर है।”

सारेगामापा लिटिल चैंप्स के जज जावेद अली ने कहा, “मैं अपने गुरुजी उस्ताद गुलाम अली खान साहब का बहुत बड़ा फैन हूं। मैं उस दिन को कभी नहीं भूल सकता, जब मैंने उनकी शागिर्दी में अपनी तालीम शुरू की थी और मैं उन्हें देखकर दंग रह गया था। आज संगीत की जो भी बारीकी और कला मुझे आती है, वो मैंने अपने गुरुजी से सीखी है। उन्होंने मुझे बताया कि हर गाने की अपनी रूह होती है और इसे बाहर लाने के लिए आपको अपनी आवाज की तकनीक समझना होता है। मुझे अब भी याद है रियाज़ के दौरान जब भी मेरी आवाज बहकती थी तो वो मुझे डांटते थे। वो मुझसे नाराज रहते थे लेकिन उनकी डांट ही मुझमें आए सुधार की सबसे बड़ी वजह बनी। एक शागिर्द के रूप में मुझे अपने गुरुजी से सबसे बड़ा उपहार यह मिला कि उन्होंने मेरी तारीफ में मेरी पीठ थपथपाई थी और संगीत के करियर में आगे बढ़ने के लिए मेरा हौसला बढ़ाया था।"

इश्क सुभान अल्लाह में कबीर का किरदार निभा रहे अदनान खान ने कहा, “मुझे लगता है मेरे लिए तो ओमप्रकाश सर ने मेरी जिंदगी में टीचर का महत्वपूर्ण रोल निभाया है। मैंने उनसे ही यह सीखा है कि यदि मैं अपना 100% नहीं दूंगा तो कोई भी मुझमें सुधार लाने में मेरी मदद नहीं कर सकताउन्होंने मुझे मेथड एक्टिंग की टेक्निक सिखाई और सिर्फ उन्हीं लोगों को सिखाया जो कड़ी मेहनत करने में सक्षम थे। उस समय मैं बहुत अच्छा नहीं था और हालांकि मैं गलतियां किया करता था, लेकिन मैं काफी मेहनत भी करता था, जिसके चलते मैं कामयाब हो पाया। उन्होंने मेरी जिंदगी में एक महत्वपूर्ण रोल निभाया है, क्योंकि उन्होंने सिर्फ 15 क्लासेज़ में मुझे मेरी कला का एहसास कराया। उनके कारण ही मैं एक्टिंग से पहले से कहीं ज्यादा प्यार करने लगा हूं।"

श्क सुभान अल्लाह में बेगम नूर जहां का रोल निभा रहीं उर्वशी उपाध्याय ने कहा, “टेलीविजन इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले मैं एक टीचर थी और जब भी बच्चे मेरे प्रति अपना प्यार और सम्मान जताते थे तो मुझे बहुत अच्छा लगता था। एक टीचर के रूप में मैं अपनी क्लास को बहुत-से ड्रामा से भर देती थी कि ताकि बच्चों को सीखने में मजा आए। इसी बहाने मुझे भी अपनी कला की पैक्टिस करने का मौका मिल जाता था। इस समय मेरे दो बच्चे हैं और महामारी की इस स्थिति में मैंने उन्हें कुछ सोशल स्किल्स सिखाने शुरू किए हैं। मैंने उन्हें कुकिंग और बेकिंग जैसे कुछ घरेलू काम के साथ-साथ दूसरी एक्टिविटीज़ भी सिखाई हैंएक बी.एड डिग्री धारक टीचर होने के नाते मैंने घर पर ही उन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया है। मुझे उम्मीद है कि एक मां और एक टीचर के रूप में मैंने अपने बच्चों को वही सिखाया है, जिसकी उन्हें जिंदगी में जरूरत है।"

कुंडली भाग्य में समीर बूथरा का रोल निभा रहे अभिषेक कपूर ने कहा, “स्कूल के दिनों में मैं बड़ा शरारती था और मैं इस बारे में जरा भी नहीं सोचता था कि मेरी शरारतों का लोगों पर क्या असर होगा। मुझे याद है एक बार मैंने शरारत करते हुए अपने एक क्लासमेट के बालों में चुइंगम चिपका दी थी, और फिर उस हिस्से के बाल काटने पड़े थे। अब मुझे एहसास होता है कि वो वाकई बहुत-ही भयानक काम था। मुझे इसके लिए कड़ी सजा मिली और इससे मुझे दोबारा ऐसी गलतियां न करने की सीख भी मिली। बचपन से ही मुझे बहुत-से टीचर्स से सीखने का मौका मिला। चाहे वो मेरे स्कूल के क्रिकेट कोच हों या फिर एक्टिंग एकेडमी के मेरे मेंटर, सभी टीचर्स ने मुझे सिखाया है कि भले ही आप कितने भी सफल हो जाएं, हमेशा विनम्र और शालीन बने रहना चाहिए। आपको हमेशा सीखते रहना चाहिए और ये नहीं समझना चाहिए कि मुझे सबकुछ आता है। जिंदगी कितनी ही मुश्किल क्यों ना हो, आप बस संघर्ष करते रहें और जीतकर सामने आएं। यही कुछ मूल्यवान सीख हैं जो मैंने अपने टीचर्स से सीखी हैं।”

ज़ी टीवी के गड्डन तुमसे ना हो पाएगा में दुर्गा जिंदन का रोल निभा रहीं श्वेता महादिक ने कहा, "आम दिनों में मेरा बेटा नियमित तौर पर स्कूल जाता था, लेकिन वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के बाद से मुझे एक मां के साथ-साथ एक टीचर भी बनना पड़ा। अपने बच्चे की पढ़ाई का जिम्मा उठाना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। यह खुद स्कूल जाने और दोबारा सबकुछ सीखने जैसा होता है। इसमें अपनी तरह की चुनौतियां थीं लेकिन अंत में मैं इसमें रम गई और मुझे अपने बेटे के साथ कुछ अच्छा वक्त गुजारने को भी मिला। मैंने सोचा कि उसे स्कूल की पढ़ाई के अलावा और भी कुछ सिखाऊं ताकि वो इसे अपनी सामाजिक जिंदगी में अपना सके। हमने पेंटिंग, डांसिंग, राइटिंग और दसरे छोटे-छोटे स्किल्स सीखे, जिनमें टेबल मैनर्स और लोगों का, खासतौर से महिलाओं का सम्मान करना आदि बातें शामिल थीं। लॉकडाउन के दौरान वैसे तो मैं अपने बेटे की टीचर बनी हुई हूं, लेकिन इस दौरान मैंने अपने बेटे से भी बहुत कुछ सीखा है।”

'गुड्डन तुमसे ना हो पाएगा' में अगस्त्य बिरला का रोल निभा रहे सवि ठाकुर ने कहा, “व्यक्तिगत तौर पर मेरे केमिस्ट्री टीचर ने मुझे वो इंसान बनाने में महत्व भूमिका निभाई, जो मैं आज हूंउन्होंने जिंदगी में मुझे हमेशा प्रेरित किया और जब भी मुझे उनसे बात करने का मौका मिलता, वो मुझे बहुत सारी पॉजिटिविटी और आगे बढ़ने की हिम्मत देते थे। मुझे याद है स्कूल में इस दिन हम लोग टीचर्स की तरह ड्रेसअप होकर उनके लिए एक नाटक पेश करते थेमुझे स्पोर्ट्स बहुत अच्छा लगता था, इसलिए मैं अपने स्पोर्ट्स टीचर की तरह ड्रेस अप होता था। उस समय हम अपने टीचर से बहुत डरते थे, लेकिन बाद में हमें उस महत्वपूर्ण सबक की अहमियत पता चली, जो उन्होंने हमें सिखाए थे। मेरी ओर से सभी को हैप्पी टीचर्स डे।"

'गुड्डन तुमसे ना हो पाएगा' में गुड्डन जिंदल का रोल निभा रही कनिका मान ने कहा, “मुझे लगता है कि हम अपनी जिंदगी में जितने लोगों से भी मिलते हैं, वो सभी हमें कुछ ना कुछ सिखाते हैं। बचपन में मेरे पैरेंट्स मेरी पढ़ाई को लेकर काफी जागरूक रहते थे, लेकिन मुझमें जरा भी धीरज नहीं था और मैं छोटी-छोटी गलतियां करती थी। मुझे याद है एक बार मेरी एक टीचर नीतू मैम ने मुझे एक छोटी-सी गलती पर मारा था। इससे मुझे एहसास हुआ कि मैं कहां गलती कर रही थी और फिर इसके बाद पढ़ाई में मेरा सुधार हुआ। हालांकि मैं उस समय काफी पढ़ाकू थी और टीचर्स की नजरों में एक अच्छी स्टूडेंट थीउस समय मेरी आदत थी कि मैं अपनी सारी टीचर से दोस्ती कर लेती थी जो मेरे लिए फायदेमंद रहता था। मुझे वाकई बहुत खुशी है कि मैं अब भी अपने हाईस्कूल और यूनिवर्सिटी के टीचर्स से जुड़ी हुई हूं और इसके लिए मैं सोशल मीडिया की आभारी हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि इस साल टीचर्स डे पर मैं अपने टीचर्स से बात करूंगी। मेरी ओर से सभी को हैप्पी टीचर्स डे।”

कुंडली भाग्य में ऋषभ लूथरा का रोल निभा रहे मनित जौरा ने कहा, “मुझे याद है स्कूल के दिनों में इस दिन हम सुबह 8:05 बजे स्कूल पहुंच जाते थे और क्लास में टीचर के आने से पहले हम बोर्ड पर हैप्पी टीचर्स डे लिखकर उन शब्दों को बड़े अच्छे से सजाते थे। हर टीचर के लेक्चर के बाद हम वो नाम मिटाकर अगली टीचर का नाम लिख देते थे, ताकि उन्हें कुछ स्पेशल महसूस हो। मैं मानता हूं कि यह दिन हर उस इंसान के नाम है, जिन्होंने मुझे शिक्षा दी और किसी ना किसी तरह मुझे प्रेरित किया। वैसे तो कोई भी इंसान, जानवर या फिर चींटी जैसा छोटा-सा प्राणी भी हमें बहुत कुछ सिखा सकता है। मेरे पास एक पालतू कुत्ता है और एक घोड़ा है और जिस निस्वार्थ भाव से वो मुझसे प्यार करते हैं, उससे मुझे सच्चे प्यार की सीख मिलती है। मैं सभी से यह कहना चाहूंगा कि वो हर उस शख्स पर गौर करें जो उन्हें सिखाते हैं और उनके टीचर बनते हैं। सभी को हैप्पी टीचर्स डे!”